বসন্তের রঙ

বসন্তের রঙ

কৃষ্ণচূড়ার রঙ লেগেছে নীল আকাশের গায়, ফাগুন হাওয়ায় মাতাল ভুবন, শীতের বিদায়। পলাশ শিমুল সেজেছে আজ রক্তিম সাজে, বসন্তের এই আগমনে মন যে নেচে ওঠে। আবির মাখা মুখের হাসি, রঙের ছড়াছড়ি, সব গ্লানি আজ মুছে যাক, এসো হাতটা ধরি। কোকিল ডাকে কুহু সুরে গাছের ডালে ডালে, নতুন প্রাণে জাগল সাড়া বসন্তের এই কালে।

#कार्निवलउत्सव #आनंदमय-उत्सवपूर्ण 😊🎊

यह कविता AI द्वारा लिखी गई है। इसे कॉपी करें, साझा करें, कार्ड या भाषणों में उपयोग करें — यह पूरी तरह से मुफ्त है और आपकी है।

मुफ़्त CC0 व्यावसायिक उपयोग
पाठ कॉपी किया गया
हटाने में त्रुटि
पुनर्स्थापित करने में त्रुटि
वीडियो प्रकाशित
वीडियो अप्रकाशित
शिकायत भेजी गई
हो गया
त्रुटि
लेखक को प्राप्त हुआ:+5+10