नारी शक्ति का उत्सव

नारी शक्ति का उत्सव

तू शक्ति का है रूप अनूप, शीतल छाया, कभी कड़ी धूप। सपनों के नभ में उड़ती जा, नई कहानियाँ गढ़ती जा। जीवन का तू है आधार, तुझसे ही है यह संसार। हर दिन तेरा सम्मान रहे, खुशियों का बस गान रहे।

यह कविता AI द्वारा लिखी गई है। इसे कॉपी करें, साझा करें, कार्ड या भाषणों में उपयोग करें — यह पूरी तरह से मुफ्त है और आपकी है।

मुफ़्त CC0 व्यावसायिक उपयोग
पाठ कॉपी किया गया
हटाने में त्रुटि
पुनर्स्थापित करने में त्रुटि
वीडियो प्रकाशित
वीडियो अप्रकाशित
शिकायत भेजी गई
हो गया
त्रुटि
लेखक को प्राप्त हुआ:+5+10