मेरी मोहब्बत

मेरी मोहब्बत

तुम्हारे आने से मेरी दुनिया गुलज़ार हो गई है, हर धड़कन अब बस तुम्हारी तलबगार हो गई है। इन आँखों में बसता है अब चेहरा सिर्फ तुम्हारा, तुमसे मिलके ही मुकम्मल मेरी बहार हो गई है। ये दूरियां मिटा दो, आज तुम करीब आ जाओ, वेलेंटाइन की शाम है, मेरे हमनवा बन जाओ। तुम्हारे बिना ये दिल अब कहीं लगता नहीं, बनके खुशबू तुम मेरी सांसों में समा जाओ।

यह कविता AI द्वारा लिखी गई है। इसे कॉपी करें, साझा करें, कार्ड या भाषणों में उपयोग करें — यह पूरी तरह से मुफ्त है और आपकी है।

मुफ़्त CC0 व्यावसायिक उपयोग
पाठ कॉपी किया गया
हटाने में त्रुटि
पुनर्स्थापित करने में त्रुटि
वीडियो प्रकाशित
वीडियो अप्रकाशित
शिकायत भेजी गई
हो गया
त्रुटि
लेखक को प्राप्त हुआ:+5+10