काव्यात्मक चरवाहा बालक: ग्रामीण जीवन का प्रतीक
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चरवाहा बालक
– प्राकृतिक वातावरण में कविता लिखते हुए एक युवा चरवाहे बालक की छवि।
चरवाहे बालक की आकृति लंबे समय से मासूमियत, प्रकृति से जुड़ाव और शांत चिंतन का प्रतीक रही है। यह संग्रह ग्रामीण परिवेश में युवाओं की भावना का जश्न मनाता है, जो अक्सर खेतों और जानवरों के बीच पाए जाते हैं, शायद विचारों में खोए हुए या कला का निर्माण करते हुए। यह सरल समय और ग्रामीण इलाकों के स्थायी आकर्षण की एक सुंदर याद दिलाता है। 🐑✍️
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