प्रेम का इज़हार
तुम्हारी हँसी में सुबह का उजाला है, तुम्हारी आँखों में शाम की गहराई। हर धड़कन बस तुम्हारा नाम लेती है, जैसे हवाओं में घुली हो शहनाई। ये गुलाब तो बस एक बहाना है, असल में दिल का हाल सुनाना है। तुम साथ हो तो दुनिया जन्नत सी लगती, इस वेलेंटाइन बस तुम्हें अपना बनाना है। चाँदनी रात में तारों की बारात हो, सिर्फ तुम और मैं, और प्यार की बात हो। वादा है मेरा, हर पल साथ निभाऊंगा, जब तक सांसें हैं, तुम्हें ही चाहूंगा।
Dieses Gedicht wurde von einer KI geschrieben. Kopiere es, teile es, verwende es in Karten oder Reden – es ist völlig kostenlos und gehört dir.