نغمهی سبز سیزده
سیزده به در آمد و گلها خندید خورشید به روی سبزه و دشت تابید غمها همه بر باد و دلها شادان سرسبز شود دوباره این باغ و جهان سبزه گره زنیم با امید و نوید تا بخت سپید و روز خوش باز آید در دامن کوه و دشت با خنده و شور نحسی ز وجود ما شود دورِ دور
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