नारी शक्ति का उत्सव
तू शक्ति का है रूप अनूप, शीतल छाया, कभी कड़ी धूप। सपनों के नभ में उड़ती जा, नई कहानियाँ गढ़ती जा। जीवन का तू है आधार, तुझसे ही है यह संसार। हर दिन तेरा सम्मान रहे, खुशियों का बस गान रहे।
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